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Prime Minister Internship Scheme 2026 Apply Online ₹9000 Stipend PMIS Registration Last Date

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Prime Minister Internship Scheme (PMIS) 2026  – भारत के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर Prime Minister Internship Scheme 2026 official banner with stipend details भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और इसी विकास यात्रा में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका है। देश के करोड़ों युवा आज बेहतर शिक्षा, रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के अवसरों की तलाश में हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा Prime Minister Internship Scheme (PMIS) 2026 शुरू की गई है। यह योजना युवाओं को देश की बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप करने का मौका देती है ताकि वे पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक कार्य अनुभव भी प्राप्त कर सकें। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं लेकिन उनके पास प्रोफेशनल अनुभव नहीं है। PM Internship Scheme युवाओं को Industry Exposure, Professional Skills और Corporate Environment में काम करने का अनुभव प्रदान करती है। Official Website: https://pminternship.mca.gov.in MyGov Official Portal: https://www.mygov.in ...

99% लोग नहीं जानते की जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है ? जानो विधि विधान एकदम सरल भाषा में

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कृष्ण जन्माष्टमी   कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है — इतिहास, महत्व, व्रत और परंपराएँ By Ramji Rathaur • प्रकाशित: 14 अगस्त 2025 कृष्ण जन्माष्टमी हिन्दू धर्म का एक ऐसा पर्व है जो हर वर्ष लाखों-करोड़ों भक्तों के हृदय में उल्लास भर देता है। यह सिर्फ एक धार्मिक संकेतक नहीं है — यह जीवन के अनमोल सिद्धांतों, सत्यम् और धर्म की विजय का उत्सव है। अगर आप सोच रहे हैं कि क्यों यह त्यौहार इतना प्रिय है और इसे मनाने का वास्तविक अर्थ क्या है, तो यह लेख आपके लिए है। 1. पौराणिक कथा — कृष्ण का जन्म और उद्देश्य पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, मथुरा के अत्याचारी सम्राट कंस ने देवकी के बच्चों को मारने की चेतावनी जारी कर रखी थी क्योंकि आकाशवाणी में बताया गया था कि उसकी मृत्यु उसी की जयंती पर होगी। इसी भय से देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया गया। जब भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी आनी थी, उसी रात श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। चमत्कारिक रूप से वसुदेव ने नवजात कृष्ण को यमुना पार गोकुल पहुँचा दिया, जहाँ नंद और यशोदा ने उनका पालन-पोषण किया। कृष्ण का मुख्य उद्देश्य था अधर्म ...

गांधी की आखिरी सांस – “हे राम” कहते हुए गिरमहात्मा पड़े राष्ट्रपिता

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 महात्मा गांधी — जीवन, विचार और प्रेरणा महात्मा गांधी महात्मा गांधी, जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते हैं। वे न केवल एक महान राजनेता थे बल्कि एक दार्शनिक, सामाजिक सुधारक और नैतिक मार्गदर्शक भी थे। उनका जीवन, सत्य, अहिंसा और त्याग के सिद्धांतों पर आधारित था, जिसने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को गहरा संदेश दिया। प्रारंभिक जीवन महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई धार्मिक और संस्कारी महिला थीं। बचपन से ही गांधीजी में धार्मिकता, ईमानदारी और करुणा के संस्कार डाले गए। शिक्षा और विदेश यात्रा गांधीजी ने प्राथमिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में प्राप्त की। 1888 में वे इंग्लैंड गए और वहां से उन्होंने बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की। इंग्लैंड में रहते हुए उन्होंने न केवल कानून की पढ़ाई की बल्कि वहां की संस्कृति, आदतों और नैतिक मूल्यों को भी गहराई से समझा। दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष 1893 में ...

कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली – कहावत का अर्थ, कहानी और इतिहास

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राजा भोज   कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली – कहावत का अर्थ, कहानी और इतिहास भारतीय संस्कृति में कहावतें सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि अनुभव, इतिहास और जीवन के गहरे संदेशों का भंडार होती हैं। इन्हीं में से एक मशहूर कहावत है – कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली । यह कहावत हम सभी ने कहीं न कहीं सुनी होगी। इसे अक्सर दो व्यक्तियों या स्थितियों के बीच तुलना करते समय प्रयोग किया जाता है, जहाँ एक बहुत उच्च स्तर का हो और दूसरा साधारण या कम योग्य। कहावत का शाब्दिक अर्थ राजा भोज – प्राचीन भारत के एक महान, विद्वान और न्यायप्रिय राजा, जो अपनी वीरता, दानशीलता और ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थे। गंगू तेली – एक साधारण तेल बेचने वाला व्यापारी, जो उस समय सामाजिक स्तर पर राजा भोज से बहुत नीचे माना जाता था। जब कोई कहता है कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली , तो इसका मतलब होता है – दो चीज़ों या व्यक्तियों की तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि उनका स्तर बहुत अलग है। कहावत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस कहावत के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन एक प्रमुख कहानी इस प्रकार है – मध्यप्रदेश के धार में राजा भ...

महात्मा बुद्ध की जीवनगाथा: संपूर्ण जीवनी, उपदेश और प्रेरणादायक विचार हिंदी में

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            महात्मा बुद्ध की संपूर्ण जीवन गाथा  महात्मा बुद्ध (गौतम बुद्ध) By • 11 August, 2025 प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि सिद्धार्थ गौतम का जन्म लगभग 563 ईपू में लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में शाक्य गण के राजा शुद्धोधन और रानी माया देवी के घर हुआ था। उनके जन्म से जुड़ी कई पौराणिक घटनाएँ प्रचलित हैं। छोटे बाल्यकाल में वे राजसी वैभव में पले-बढ़े, परंतु भीतर से वे संसार के दंश और दुखों को समझना चाहते थे। चार दृश्य और त्याग का निर्णय एक दिन महल के बाहर निकलकर सिद्धार्थ ने चार दृश्य देखे — वृद्धावस्था, बीमारी, मृत्यु और एक संन्यासी। इन दृश्यों ने उनके मन में गहरा प्रभाव छोड़ा और वे सत्य की खोज के लिए संन्यास ले गए। तप, मध्यम मार्ग और बोधि प्राप्ति उन्होंने वर्षों तक कठोर तपस्या की परन्तु शांति न मिली। अंततः उन्होंने ‘मध्यम मार्ग’ अपनाया — न अतिशय तप, न भोग-विलास। बोधगया के बोधि वृक्ष के नीचे गहन ध्यान में लीन होकर 35 वर्ष की आयु में उन्हें पूर्ण...

महाराणा प्रताप — वह दुखभरी गाथा जो हर भारतीय की आंखें नम कर देगी |

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महाराणा प्रताप — एक दुखभरी और प्रेरणादायक गाथा महाराणा प्रताप  महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में साहस, गर्व और अडिग निश्चय के साथ दर्ज है। उनकी जीवनगाथा सिर्फ युद्धों की कहानी नहीं है — यह सम्मान के लिए की गई उस कुर्बानी की कहानी है, जहाँ भूख, तंगी और अपार कठिनाइयों के बावजूद भी उन्होंने किसी भी कीमत पर अपना स्वाभिमान नहीं गिरने दिया। शूरवीर का जन्म और प्रारंभिक जीवन महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था। वे मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह के पुत्र थे। बचपन से ही प्रताप में वह उग्र ऊर्जा और असाधारण साहस दिखाई देता था जो बाद में पूरी तरह उद्भासित हुआ। घुड़सवारी और युद्धकला उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई। वे कभी भी किसी के आगे घुटने नहीं टेकने वाले स्वभाव के थे। अकबर से नाराज़गी — स्वतंत्रता बनाम समर्पण जब मुगल शासक अकबर ने राज्य-विस्तार की नीति अपनाई, तो कई राजाओं ने समझौता कर लिया। पर महाराणा प्रताप के लिए मेवाड़ की आज़ादी किसी भी कीमत पर तय थी। अकबर की तरफ से संधि-प्रस्ताव आए — सुख सुविधाएँ, पद और दौलत — पर प्रताप ने इन सबको ठुकरा दिया। उनके लिए देश और सम्मान ध...

महावीर कर्ण – वो योद्धा जिसे इतिहास भी सलाम करता है!

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महावीर कर्ण – वो योद्धा जिसे इतिहास भी सलाम करता है!                महावीर कर्ण महावीर कर्ण – वो योद्धा जिसे इतिहास भी सलाम करता है! महावीर कर्ण महावीर कर्ण – त्याग, वीरता और दान का अनोखा प्रतीक महाभारत के इतिहास में अगर किसी योद्धा का नाम सबसे अलग और अद्वितीय है, तो वो है महावीर कर्ण । कर्ण सिर्फ एक योद्धा नहीं, बल्कि दानवीरता, निष्ठा और साहस का जीवंत उदाहरण थे। उनका जीवन जन्म से लेकर मृत्यु तक संघर्ष, अपमान, और महानता की मिसाल से भरा था। जन्म का रहस्य और पहचान कर्ण का जन्म कुंती से विवाहपूर्व हुआ था। सूर्य देव की कृपा से जन्मे कर्ण के कानों में कुंडल और शरीर पर कवच जन्म से ही मौजूद थे। समाज के डर से कुंती ने नवजात कर्ण को एक टोकरी में रखकर गंगा में बहा दिया। उन्हें हस्तिनापुर के सारथी अधिरथ और उनकी पत्नी राधा ने अपनाया और उनका नाम पड़ा राधेय । वीरता की खोज और शिक्षा कर्ण बचपन से ही धनुर्विद्या में अद्भुत थे, लेकिन उन्हें क्षत्रिय न मानने के कारण गुरु द्रोणाचार्य ने शिक्षा देने से मना कर दिया। उन्होंने महान गुरु प...

🧍‍♂️ राकेश शर्मा के साथ घटित रहस्यमयी घटना – भानगढ़ की सच्ची कहानी

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  राकेश शर्मा की रहस्यमयी यात्रा: भानगढ़ किले के डरावने किस्से और सच😱😱😱 राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ किला भारत के सबसे रहस्यमयी और भूतिया स्थानों में गिना जाता है। इसकी कहानी में इतिहास, किंवदंतियां और डर का अनोखा मिश्रण है। जब राकेश शर्मा ने इस किले की यात्रा करने का निश्चय किया, तो वे रोमांच और रहस्य के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि यह सफर उनके दिल में हमेशा के लिए एक गहरी छाप छोड़ देगा। भानगढ़ किले का इतिहास भानगढ़ किले का निर्माण 16वीं सदी में राजा भगवंत दास ने करवाया था और इसे उनके बेटे माधो सिंह को उपहार में दिया गया था। कहा जाता है कि यह किला कभी बेहद समृद्ध और सुंदर नगर था। लेकिन एक तांत्रिक सिंघिया ने भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती को पाने के लिए काला जादू किया। योजना असफल रही और राजकुमारी ने तांत्रिक को मौत के घाट उतार दिया, लेकिन मरते समय उसने पूरे नगर को श्राप दे दिया। श्राप के बाद नगर बर्बाद हो गया और यह किला वीरान हो गया। राकेश शर्मा का सफर शुरू राकेश शर्मा ने अपने कुछ करीबी दोस्तों के साथ एक ठंडी सुबह भानगढ...